नवरात्रि में गरबा की धूम

छत्‍तीसगढ़ प्रदेश की राजधानी रायपुर एक ऐतिहासि शहर है यहां पूरातत्‍व कालिन मां कंकाली देवी का मंदिर, मां महामायी देवी का मंदिर, मां शीतला देवा का मंदिर, दूधाधारी मठ, अंबा देवी मंदिर जेतुसाव मठ के साथ पिछले 50-60 वर्षों में बने श्री राम मंदिर शांति नगर, बंजारी मंदिर रावांभाटा, काली मंदिर रावण भाटा, काली मंदिर आकाशवाणी चौक, काली मंदिर काली बाड़ी, काली मंदिर जनता कॉलोनी गुढियारी, बंजारी मंदिर यूर्निवसिटी, अादि प्रमुख देवी मंदिर यहां स्‍थापित हैं। इन मंदिरों में परंपरागत रूप से देवी ज्‍योत जलने के अलावा मनोकामना ज्‍योत जलने की परंपराऐं भी हैं।

अब वर्तमान परिवेश में वर्ष-प्रतिवर्ष बढ़ते गुजरात की परंपरा के संवर्धक गरबा खेलने की परंपरा और जोश बढ़ता ही जा रहा है। बढ़े-बढ़े आयोजन हो रहें हैं इन आयोजनों में प्रायोजक अपनी दुकानों की वस्‍तुओं के ग्राहक खोज रहें हैं। प्रतिस्‍पर्धि बाजार में इन आयोजनों को नई दिशा दी है शहर में इस समय आर्शीवाद भवन बैरन बाजार, गुजराती स्‍कूल मौधापारा, रासगरबा मैदान देवेन्‍द्र नगर, अंबादेवी मंदिर शक्ति बाजार, सुंदरलाल शर्मा स्‍कूल सुंदर नगर, समता कॉलोनी पाटी दार भनपुरी, शिव मंदिर कटोरा तालाब, बीटीआई ग्राउंड शंकर नगर सहित कई स्‍थानों में रासगरबा की तैयारी जोरों पर है।

मां देवी के पारंपारिक जस गीतों में गरबा के माध्‍यम से देवी की उपासना को लोग एक मनोरंजन के साधन के रूप में भी तेजी से अपना रहें हैं। दुकानदार, बाजारवाद और व्‍यवसायिकता के चलते इसे अपना व्‍यवसायिक धंधा बना रहें हैं, इन सब के बीच यह बात प्रशंसनीय है कि भारत जैसे धार्मिक देश में छत्‍तीसगढ़ की धर्म प्रेमी जनता, धर्म और देवी उपासना के लिये आने वाले 9 दिन इस शुभकार्य कके लिए समय निकालेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *